ज्ञान मुद्रा क्या है? इसकी विधि, फायदे व सावधानियां | Gyan Mudra in Hindi

Gyan Mudra in Hindi : मेडिटेशन करते समय हाथों को एक खास प्रकार की मुद्रा में रखने की सलाह दी जाती है, जिसमें अंगूठे (thumb) को तर्जनी उंगली (index finger) से स्पर्श किया जाता है। हाथों की इस मुद्रा को ही ज्ञान मुद्रा कहते हैं। इसे आप बैठकर, लेटकर या फिर खड़े होकर भी कर सकते हैं। इसका अभ्यास काफी आसान है और इसे वो लोग भी आसानी से कर सकते हैं, जिन्हें योगासन व प्राणायाम करने में परेशानी होती है। 

योग में आसन और प्रणायाम की तरह हस्त मुद्राओं को भी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना गया है। ज्ञान मुद्रा (gyan mudra in hindi) हस्त मुद्राओं में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि इस मुद्रा के अभ्यास से मनुष्य की बुद्धि व स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है और मन में चल रहे नकरात्मक विचार दूर होते हैं। साथ ही अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए भी ज्ञान मुद्रा के लाभ (gyan mudra benefits in hindi) अच्छे हैं।

ज्ञान मुद्रा में अंगूठे और तर्जनी उंगली का उपयोग होता है। अंगूठे की नोक को तर्जनी की नोक से स्पर्श करके इसका अभ्यास किया जाता है। योग शास्त्रों में अंगूठे को “अग्नि” व तर्जनी को “वायु” का प्रतीक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि ज्ञान मुद्रा करने से दिमाग तेज होता है और घुसे व भय से मुक्ति मिलती है।

ज्ञान मुद्रा क्या है – Gyan Mudra in Hindi

ज्ञान मुद्रा, हस्त मुद्रा का एक प्रकार है। योग में आसन और प्राणायाम की तरह हस्त मुद्राओं को भी शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना गया है। हाथों की उँगलियों से एक विशेष प्रकार की मुद्रा बनाने को हस्त मुद्रा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है की हाथों की उँगलियों में पंचतत्व मौजूद होते हैं।

जिसमें अंगूठे को अग्नि, तर्जनी ऊँगली को वायु, बीच की ऊँगली को आकाश, अनामिका को पृथ्वी और सबसे छोटी ऊँगली (कनिष्का) को जल का प्रतीक माना गया है। 

प्रतेक हस्त मुद्रा में एक खास तरीके से अंगूठे के साथ किसी अन्य ऊँगली का इस्तेमाल किया जाता है। ज्ञान मुद्रा (gyan mudra in hindi) में अंगूठे के साथ तर्जनी ऊँगली का इस्तेमाल होता है। जिसमें अंगूठे की नोक को तर्जनी की नोक से स्पर्श करना होता है। इस क्रिया को आप ध्यान करते समय, प्राणायाम करते समय या फिर किसी भी आरामदायक अवस्था में बैठकर, लेटकर या खड़े होकर भी कर सकते हैं।  

ज्ञान मुद्रा करने का तरीका – Gyan Mudra Karne Ka Tarika

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ज्ञान मुद्रा को आप बैठकर या खड़े होकर किसी भी पोजीशन में कर सकते हैं। लेकिन वज्रासन, पद्मासन या सुखासन में बैठकर इसका अभ्यास करना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। तो आइये, जानते है ज्ञान मुद्रा करने का सही तरीका क्या है।  

  • ज्ञान मुद्रा के अभ्यास के लिए सबसे पहले किसी शांत जगह का चुनाव करें। 
  • किसी समतल व साफ जगह पर मैट बिछा लें।
  • उसके बाद किसी भी आरामदायक पोजीशन, वज्रासन, पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं।
  • आपकी रीढ़ बिल्कुल सीधी और सिर थोड़ा ऊँचा उठा हुआ होना चाहिए। 
  • अब अपने दोनों हाथों को पैरों के घुटनों को ऊपर रखें। 
  • दोनों हाथों की उंगलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए। 
  • उसके बाद अपनी तर्जनी उंगली को अंगूठे की नोक से स्पर्श करें। 
  • बाकि की तीनों उँगलियाँ को सीधा रखें, लेकिन इन्हें खींचने का प्रयास न करें। 
  • उंगलियों में किसी प्रकार का दबाव  या जोर न डालें। 
  • अपनी आंखे बंद कर लें और धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें। 
  • आप चाहे तो ॐ या किसी अन्य मंत्र का उच्चारण भी कर सकते हैं। 
  • कम से कम 15 मिनट इस अवस्था में रहें और फिर इससे बाहर आ जाएं।
  • इस विधि को आप 2-3 बार भी दोहरा सकते हैं।        

ज्ञान मुद्रा के फायदे – Gyan Mudra Benefits in Hindi

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1. स्मरण शक्ति बढ़ती है 

ज्ञान मुद्रा स्मरण शक्ति को बढ़ाने में मददगार होती है। जो लोग दैनिक जीवन में छोटी-छोटी चीजों को याद नहीं रख पाते हैं, उनके लिए यह हस्त मुद्रा काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है। साथ ही स्टूडेंट्स के लिए भी ज्ञान मुद्रा के फायदे (gyan mudra benefits in hindi) अच्छे हैं, इससे पढ़ाई में काफी लाभ मिल सकता है। 

2. एकाग्रता में वृद्धि होती है 

किसी भी कार्य को ठीक ढंग से करने के लिए एकाग्र मन की जरूरत होती है, ताकि पूरे फोकस के साथ उस कार्य को किया जा सके। लेकिन बहुत से लोगों में एकाग्रता की कमी देखी जाती है, उनका ध्यान जल्दी भटक जाता है। ऐसे में इस समस्या को दूर करने के लिए भी ज्ञान मुद्रा (gyan mudra in hindi) का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। इसके अभ्यास से एकाग्रता में वृद्धि होती है, जिससे किसी भी काम को पूरे फोकस के साथ करने में मदद मिलती है।

3. क्रोध शांत होता है

क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा सत्रु माना गया है। क्रोध मनुष्य का सभाव है, इसे पूर्णतः समाप्त करना मुश्किल है, लेकिन इसे कम जरूर किया जा सकता है। ज्ञान मुद्रा (gyan mudra in hindi) क्रोध को कम करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकती है, इसके अभ्यास से क्रोध कम होता है और मन शांत रहता है। जो लोग छोटी-छोटी बातों पर जल्दी क्रोधित हो जाते हैं या बेवजह किसी पर भड़क जाते हैं, उनके लिए ज्ञान मुद्रा बेहद फायदेमंद हो सकती है।

4. अनिद्रा की समस्या के लिए

अनिद्रा यानी रात को नींद न आना एक बड़ी समस्या है जो शारीरिक और मानसिक रोगों बढ़ावा देने का कार्य करती है। नींद पूरी न होने से काम में भी सही से मन नहीं लगता और शरीर पूरा दिन थका-थका से महसूस करता है। ऐसे में इस समस्या के लिए भी ज्ञान मुद्रा का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। इससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और रात को अच्छी नींद आती है।   

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ज्ञान मुद्रा के अन्य लाभ – Other Benefits of Gyan Mudra

  • मन शांत रहता है। तनाव व चिंता कम होती है।  
  • सिरदर्द की समस्या में आराम मिलता है। 
  • दिमाग में चल रहे नकरात्मक विचार दूर होते हैं।
  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 
  • इसके अभ्यास से आत्मविश्वास में भी बढ़ावा मिलता है।  

ज्ञान मुद्रा की सावधानियां – Gyan Mudra ki Savdhaniya

ज्ञान मुद्रा (gyan mudra) करते समय कुछ लोग हाथों की उंगलियों पर बहुत ज्यादा दबाव या खिंचाव उत्पन्न करने की कोशिश करते हैं, जिससे पूरा ध्यान हाथों की उंगलियों पर ही लगा रहता है, जो ठीक नहीं है। साथ ही थोड़ी देर बाद उंगलियों में दर्द का अनुभव भी होने लगता है, जिससे भी ज्ञान मुद्रा में बाधा उत्पन्न होती है। इसलिए आप ऐसी गलती न करें। साथ ही भोजन के तुरंत बाद ही ज्ञान मुद्रा का अभ्यास न करें। 

ज्ञान मुद्रा करने का सही समय – Gyan Mudra Karne Ka Sahi Samay

ज्ञान मुद्रा (gyan mudra) का अभ्यास किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन सुबह का समय इसके अभ्यास के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है। जबकि शाम व रात  को सोने से पहले भी ज्ञान मुद्रा (gyan mudra) कर सकते हैं, सिर्फ एक चीज का ध्यान रखें की भोजन के तुरंत बाद इसका अभ्यास न करें। जो लोग योग करते हैं वे योगसन करने से पहले या बाद में भी इसका अभ्यास कर सकते हैं।  

ज्ञान मुद्रा कितनी देर तक करना चाहिए – Gyan Mudra Kitni Der Tak Karna Chahiye

ज्ञान मुद्रा का अभ्यास आप जितनी देर करना चाहे कर सकते हैं। शुरुआत में कम से कम 15 मिनट तक इसका अभ्यास जरूर करें और फिर धीरे-धीरे समय को बढ़ाते रहें। फिर इसे 45-50 मिनट तक करने की कोशिश करें। आप चाहे तो दिन में 2-3 बार भी इसका अभ्यास कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – FAQ

Q. क्या ज्ञान मुद्रा खड़े होकर कर सकते हैं?

Ans. जी हाँ, ज्ञान मुद्रा का अभ्यास सीधे खड़े होकर भी कर सकते है। 

Q. क्या कपालभाति प्राणायाम करते समय ज्ञान मुद्रा करना सही रहता है?

Ans.जी हाँ, आप कपालभाति करते समय भी हाथों को ज्ञान मुद्रा में रख सकते हैं। 

Q. ज्ञान मुद्रा करने के क्या फायदे हैं?

Ans. ज्ञान मुद्रा करने से बुद्धि तेज होती है, याददास्त सही रहती है, एकाग्रता बढ़ती है, गुस्सा शांत होता है और नींद में सुधार होता है। 

Q. ज्ञान मुद्रा का अभ्यास कब करना चाहिए ?

Ans. ज्ञान मुद्रा का अभ्यास आप किसी भी समय कर सकते है, सिर्फ भोजन करने के तुरंत बाद इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। 

निष्कर्ष – Conclusion

लोग योगासन और प्राणायाम से तो भलीभांति परिचित है, लेकिन मुद्राओं के बारे में कम जानकारी रखते हैं। स्वास्थ्य के लिए मुद्राओं को योगासन व प्राणायाम से भी ज्यादा उपयोगी माना गया है, इसलिए आपको इनके बारे में भी जरूर पता होना चाहिए। योग में कई तरह की मुद्राओं का वर्णन मिलता है, सब की अपनी-अपनी खूबियां है। 

इस लेख में हमने ज्ञान मुद्रा (gyan mudra in hindi) के बारे में जाना और आगे हम और भी मुद्राओं के बारे में आपको जानकारी देने की कोशिश करेंगे। उम्मीद है की आपको यह लेख पसंद आया होगा और ज्ञान मुद्रा के बारे में आपके सभी डाउट क्लियर हो गए होंगे।

यदि आपके मन में अभी भी कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।  साथ ही इसी तरह की जानकारियों के लिए आप हमारे अन्य लेख भी पढ़ सकते हैं और इस लेख को अन्य लोगों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर भी कर सकते हैं।  

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Deepak Bhatt

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