वज्रोली मुद्रा के अध्भुत फायदे, विधि और सावधानियां | Vajroli Mudra in Hindi

Vajroli Mudra in Hindi : आज हम योग की एक ऐसी चमत्कारिक और शक्तिशाली मुद्रा के बारे में बात करेंगे जिसके सेकड़ो लाभ है। हम बात कर रहे हैं वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra in hindi) की, वज्रोली मुद्रा यौन समश्याओं के निवारण के लिए सबसे अच्छी और ताकतवर क्रिया है, इसके निरंतर अभ्यास से किसी भी तरह की यौन समस्या का निवारण किया जा सकता है। साथ ही इसके और भी कई सारे लाभ है।

लेकिन वज्रोली मुद्रा के फायदे (vajroli mudra benefits in hindi) प्राप्त करने के लिए इसे सही तरीके से करना जरूरी होता है। यह एक जटिल क्रिया है इसलिए इसे सही ढंग से समझना जरुरी होता है। अगर आप वज्रोली मुद्रा के लाभ, विधि व सावधानियों के बारे में जानना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

वज्रोली मुद्रा क्या है – Vajroli Mudra in Hindi

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वज्रोली एक योग मुद्रा हैं जिसके अभ्यास से वीर्यपात की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता हैं, इसके साथ ही शीघ्रपतन और कई अन्य यौन समस्याओं में भी यह मुद्रा फायदेमंद होती हैं। वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra hindi) हठयोग की मुद्रा हैं, इसका अभ्यास बहुत ज्यादा जटिल हैं। महिला व पुरुष दोनों ही इस मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं, दोनों के लिए ही इस मुद्रा के बराबर फायदे हैं। 

कहा जाता हैं कि जब कोई योगी इस मुद्रा को सिद्ध कर लेता हैं तब वह अपने लिंग या योनी से पानी, दूध और शहद को भी ऊपर खींच सकता हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितनी जटिल क्रिया हैं और इस क्रिया में कितने अभ्यास की जरूरत होगी। लेकिन हम आपको ऐसा करने की सलाह नहीं देंगे, वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra in hindi) बिना गुरु की सलाह से नहीं करनी चाहिए। अगर इस क्रिया में थोड़ी सी भी गलती हुई तो इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

इस क्रिया को कोई एक या दो दिन में सिद्ध नहीं किया जा सकता, इसमें लंबा समय लग सकता हैं। इस आर्टिकल में हम आपको वज्रोली क्रिया का आसान तरीका बताएंगे जिसे आप आसानी से कर सकते हैं और वज्रोली मुद्रा के फायदे (benefits of vajroli mudra in hindi) भी पा सकते हैं।     

वज्रोली मुद्रा करने का तरीका – Vajroli Mudra Steps in Hindi

वज्रोली मुद्रा कई तरह से की जाती हैं, यह काफी जटिल क्रिया हैं इसलिए हम आपको केवल आसान तरीका बताने की कोशिश करेंगे जिसे आप आसानी से कर सके। साथ जी वज्रोली मुद्रा से पहले आप कुछ योगासन और योग मुद्रा में निपुण हो जाए उसके बाद ही इस मुद्रा का अभ्यास करें, जिससे वज्रोली मुद्रा में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। 

वज्रोली मुद्रा (vajroli yog mudra) से पहले आप तितली आसन, आनंद बालासन , सुप्त पादांगुष्ठासन, सेतु बंधासन, अधोमुख श्वानासन व वीरभद्रासन जैसे योगासन करें और इनमें निपुण हो जाएं, ये सभी आसन पेल्विक एरिया के लिए अच्छे होते हैं और इनसे पेल्विक एरिया मजबूत होता हैं।

पेल्विक दोनों जांघों के बीच का एरिया होता हैं, जो यौन क्रियाओं के लिए अच्छा होता हैं। साथ ही वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra in hindi) करने से पहले मूलबंध और अश्विनी मुद्रा भी अवश्य  करें। अश्विनी मुद्रा काफी हद तक वज्रोली मुद्रा जैसी ही हैं।

वज्रोली मुद्रा करने की पहली विधि

वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra hindi) की पहली विधि बहुत आसान हैं और इसे आप आसानी से कर सकते हैं। यह काफी हद तक अश्विनी मुद्रा जैसी ही हैं, दोनों में बस सूक्ष्म अंतर हैं।

  • सबसे पहले किसी शांत जगह का चुनाव करें
  • जमीन पर मैट बिछाकर पदमासन या सुखासन मुद्रा में बैठ जाएं
  • 4 से 5 बार लंबी लंबी सांस ले और थोड़ा रिलैक्स करें 
  • फिर अपनी दोनों आंखें बंद करें 
  • अपना पूरा ध्यान पेल्विक मसल (गुदाद्वार व अंडकोष के बीच का भाग) पर लगाए 
  • जब आप सांस ले तो गुदाद्वार व अंडकोष के बीच के भाग को संकुचित करें, कुछ देर सांस रोक के रखें 
  • धीरे धीरे सांस छोड़े और पेल्विक मसल को भी रिलैक्स दें। 
  • यह विधि आप 20-30 बार दोराहे

वज्रोली मुद्रा करने की दूसरी विधि

योग में वज्रोलि मुद्रा की दूसरी विधि (vajroli mudra ki vidhi) काफी जटिल हैं यह हठयोग के अंतर्गत आती है। आपको इसका अभ्यास नहीं करना हैं, यह विधि केवल आपकी जानकारी के लिए बताई जा रही है।

  • इस क्रिया में रबड़ की एक पाइप को लिंग के छेद के अंदर डाला जाता है
  • इसे रोज एक एक इंच बढ़ाया जाता हैं, जब तक की यह 10 इंच तक अंदर न चली जाए 
  • उसके बाद इस क्रिया को करने के लिए चांदी से बनी पाइप का इस्तेमाल किया जाता है 
  • निरंतर अभ्यास से जब छेद बड़ा हो जाता हैं तब इस छेद से पानी को खींचने का अभ्यास किया जाता है
  • पानी से बाद दूध और फिर शहद जैसे तरल पदार्थों को भी खींचने का अभ्यास किया जाता है

यह क्रिया (vajroli mudra ki vidhi) आम लोगों की बस की बात नहीं है, इसे केवल योग में माहिर साधक ही कर सकते हैं। किसी योग विशेषज्ञ की उपस्थिति में ही यह क्रिया की जाती हैं। योग विशेषज्ञ के बिना आप इस क्रिया को करने की बिलकुल भी न सोचे, यह आपको क्षति पहुंचा सकती है। 

वज्रोली मुद्रा के फायदे – Vajroli Mudra Benefits in Hindi

वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra hindi) के अनेक लाभ हैं, कई तरह की शारीरिक बीमारियों में वज्रोली मुद्रा फायदेमंद होती हैं साथ ही इसके कई मानसिक लाभ भी हैं। वज्रोली मुद्रा के लाभ (benefits of vajroil mudra in hindi) इस प्रकार हैं। 

1. यौन समस्याओं के लिए वज्रोली मुद्रा के फायदे 

यौन समस्याओं के लिए वज्रोली मुद्रा के फायदे (vajroli mudra benefits in hindi) बेहतरीन हैं। वज्रोली मुद्रा का नियमित अभ्यास शिग्रपतन (वीर्य का जल्दी निकल जाना) और स्वप्नदोष जैसी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता हैं साथ ही इससे लिंग व योनी से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं भी दूर होती हैं।

यौन समस्याओं के लिए आजकल लोग तरह तरह के चूर्ण व दवाइयां खा रहे हैं जिनका असर बस कुछ समय तक ही रहता हैं, दवाई छोड़ने के बाद समस्या दोबारा से उभरने लगती हैं। दवाइयों को छोड़कर योग के जरिए यौन संबंधी समस्याओं को हल किया जा सकता हैं और योग का असर दीर्घकाल तक भी रहता हैं। 

2. वज्रोली मुद्रा के लाभ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में 

वज्रोली मुद्रा से पाचन मजबूत होता हैं और  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं जिससे शरीर विभिन्न प्रकार की बीमारियों से दूर रहता हैं। योग शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीकाहैं और वज्रोली मुद्रा इसमें सबसे उत्तम हैं। 

3. ब्रह्मचर्य का पालन करने में मददगार

वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra hindi) ब्रह्मचर्य का पालन करने में भी फायदेमंद होती हैं। जो लोग ब्रह्मचर्य जीवन व्यतीत करना चाहते हैं उनके लिए वज्रोली क्रिया सबसे उत्तम हैं। वज्रोली मुद्रा द्वारा मन पर भी काबू पाया जा सकता हैं।

4. नकारात्मक और बुरे विचार दूर करने में लाभकारी 

जिन लोगों के मन में दिनभर कामुक विचार उत्पन्न होते रहते हैं उनके लिए भी वज्रोली मुद्रा के फायदे (vajroli mudra benefits in hindi) अच्छे हैं। ऐसे लोग वज्रोली मुद्रा की मदद से अपने मन को  साफ कर सकते हैं और मन से नकारात्मक व बुरे विचार दूर कर सकते हैं। 

5. बवासीर के लिए वज्रोली योग मुद्रा के फायदे 

वज्रोली मुद्रा मलद्वार (Anus) से संबंधित परेशानियों जैसे बवासीर, अर्श व भगंदर में भी काफी सहायक (vajroli mudra ke fayde) होती हैं। नियमित इसके अभ्यास से मलद्वार से संबंधी परेशानी नहीं हो सकती।

6. वज्रोली मुद्रा के अन्य लाभ

वज्रोली मुद्रा मलद्वार मूत्र रोग जैसे बार-बार पेशाब आना, रुक-रुक कर पेशाब आना व पेशाब करते समय लिंग व योनी में जलन होना में भी कारगर हैं।

वज्रोली मुद्रा में सावधानियां – Vajroli Mudra Precaution in Hindi

  • वज्रोली मुद्रा का अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए, खाना खाने के तुरंत बाद इस मुद्रा कभी भी इस मुद्रा का अभ्यास न करें। 
  • मल मूत्र त्यागने के बाद ही वज्रोली मुद्रा का अभ्यास करें। 
  • मलद्वार से संबंधित किसी गंभीर समस्या में यह वज्रोली मुद्रा न करें। 
  • नाभि में दर्द हो तो वज्रोली मुद्रा न करें। 
  • पेट दर्द या पेट ख़राब हो तो यह मुद्रा न करें। 
  • साथ ही किसी योग विशेषज्ञ की देख रेख में ही वज्रोली मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। 

निष्कर्ष – Conclusion

योग में वज्रोली क्रिया का एक अहम स्थान हैं और इस क्रिया को कुछ ही साधक कर पाते हैं। कहा जाता हैं की जब साधक इस क्रिया में निपुण हो जाता हैं तो वह अपने लिंग से वीर्य को खींचने की भी शक्ति रखता हैं, जिससे वीर्य का नाश न हो और शरीर में शक्ति बनी रहे।

साथ ही वज्रोली मुद्रा (vajroli mudra in hindi) को करने के लिए मानसिक संतुलन का मजबूत होना भी बहुत जरूरी हैं। मन ही हैं जो इस तरह की जटिल क्रिया को भी करने की शक्ति प्रदान करता हैं। 

उम्मीद हैं की आपको हमारा यह आर्टिकल वज्रोली मुद्रा के फायदे (vajroli mudra benefits in hindi) पसंद आया होगा और आपने इससे कुछ नया सीखा होगा। आपको एक बार फिर बता दे की यह आर्टिकल केवल आपकी जानकारी के लिए हैं इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप वज्रोली क्रिया करने की न सोचे। वज्रोली क्रिया हमेशा ही योग गुरु की देख रेख में भी करनी चाहिए, योग में माहिर कुछ लोग ही इस क्रिया को कर सकते हैं।

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